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  • अर्थो हि कन्या परकीय एव तामद्य संप्रेष्य परिग्रहीत. . . | Sanskrit. Today
    The term परकीय points to this foreignness and the societal norm where a woman transitions into another family, which raises questions about identity and belonging
  • अर्थो हि कन्या परकीय एव
    अर्थो हि कन्या परकीय एव तामद्य संप्रेष्य परिग्रहीतुः । जातो ममायं विशदः प्रकामं प्रत्यर्पितन्यास इवान्तरात्मा ॥
  • अर्थो हि कन्या परकीय एव – Navprabha
    माधव जूलियनांच्या ‘अर्थो हि कन्या परकीय एव’ या कवितेत पित्याची भावना तत्सदृश असली तरी आपल्या मुलीची आता ताटातूट होणार आहे ही
  • अर्थो हि कन्या परकीय एव
    संस्कृत साहित्य में एक सर्व श्रेष्ठ नाटक "अभिज्ञान- शाकुन्तलम् " है, जो कि महाकवि कालिदास द्वारा रचित है । उसमें महर्षि कण्व द्वारा पालित कन्या शकुन्तला का गान्धर्व-विवाह राजा दुष्यन्त के साथ होने, दुर्वासा के शाप के कारण दुष्यन्त के द्वारा शकुन्तला को नहीं पहचानने के कारण उसको नहीं अपनाने और अन्त में दुष्यन्त-शकुन्तला का पुनर्मिलन हो जान तक का वृतान्त वर्णित है। इस नाटक का चौथा अंक तो सबसे अधिक भावपूर्ण है । जिसमे कण्व द्वारा शकुन्तला को को उसके पति के पास भेजने हेतु एक पिता द्वारा अपनी पुत्री को पराया धन बताया गया है ।
  • अर्थो हि कन्या परकीय एव - इत्यस्मिन् श्लोके छन्दः-
    'अर्थो हि कन्या परकीय एव' अर्थात् कन्या पराया धन होता है। यह शकुंतला विदाई के समय का वर्णन है। यह महाकवि कालिदास की रचना है।
  • कन्या - विकिसूक्तिः
    धनं परस्यैव हि कन्यकाजनो, निक्षेपमात्रं पित्तृगेहवर्तनम् । कमलिनीकलहंसम्, IV २ निर्भिन्नं खलु हृदयरहस्यं कोपयति कन्यकाजनम् ।
  • निम्नलिखित में से किसी एक सूक्ति की सन्दर्भ सहित हिन्दी में व्याख्या . . .
    प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि मां बाप कन्याओं को पालते पोसते हैं और फिर उसका विवाह करके किसी दूसरे को सौंप देते हैं वह घड़ी बहुत ही कष्टदायक व पीड़ादायक होती है इसलिए कवि ने कहा है कि कन्या पराया धन होती हैं।
  • “अर्थो हि कन्या परकीय एव तामद्य संप्रेष्‍य परिग
    “अर्थो हि कन्या परकीय एव तामद्य संप्रेष्‍य परिग्रहीतुः।'' यह कथन किसका है? 1 गौतमी का 2 प्रियंवदा का 3 काश्यप का 4 अनसूया का
  • अर्थो हि कन्या परकीय एवकृष्णसपपकर्था
    परकीय एव अर्थपः का भवहत ? (पराया धि क्या िोता िै?) उत्तरम्: पपकीय एर् अथाः कन्या िर्ति। (पपाया ध न कन्या ेनिी ेै।) हिबन्धात्मक प्रश्नाः
  • RBSE Class 11th संस्कृत अर्थो हि कन्या परकीय एव Solutions
    Access RBSE Class 11th संस्कृत अर्थो हि कन्या परकीय एव Solutions View detailed step-by-step solutions for अर्थो हि कन्या परकीय एव chapter in संस्कृत subject





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